आज की मेडिकल दुनिया में Sonography एक बेहद ज़रूरी और commonly इस्तेमाल की जाने वाली टेस्ट है। कई लोग इसे अल्ट्रासाउंड के नाम से जानते हैं, लेकिन बहुत से लोग अब भी यह नहीं जानते कि sonography meaning in Hindi क्या होता है, इसका उपयोग क्यों किया जाता है, और यह कैसे काम करता है।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे – सोनोग्राफी कैसे की जाती है, किस-किस प्रकार की होती है, pregnancy में इसका क्या रोल है और इससे जुड़े अन्य जरूरी सवालों के जवाब।
सोनोग्राफी क्या होती है? | What is Sonography?

Sonography को हिंदी में ध्वनि-प्रतिध्वनि परीक्षण या अल्ट्रासाउंड जांच कहा जाता है।
Sonography meaning in Hindi है – “एक ऐसी तकनीक जिसमें शरीर के अंदरूनी अंगों की छवि (image) देखने के लिए उच्च-आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों (ultrasound waves) का उपयोग किया जाता है।”
सोनोग्राफी में शरीर के अंदर की तस्वीरें बनाने के लिए उच्च आवृत्ति (High-Frequency) वाली ध्वनि तरंगों (Sound Waves) का उपयोग किया जाता है। इसमें किसी प्रकार की रेडिएशन (Radiation) नहीं होती, इसलिए इसे गर्भावस्था सहित कई स्थितियों में सुरक्षित माना जाता है।
यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी चीरफाड़ (non-invasive) के की जाती है, और यही वजह है कि यह बहुत सुरक्षित मानी जाती है। इसका इस्तेमाल गर्भावस्था से लेकर आंतरिक अंगों की बीमारी तक में होता है।
सोनोग्राफी (अल्ट्रासाउंड) कैसे की जाती है? पूरी प्रक्रिया
सोनोग्राफी (Ultrasound) एक सरल और सुरक्षित डायग्नोस्टिक जांच है, जिसमें शरीर के अंदर की तस्वीरें उच्च ध्वनि तरंगों (हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स) से ली जाती हैं। यदि आपको पहली बार सोनोग्राफी कराने की सलाह दी गई है, तो इसकी पूरी प्रक्रिया जानना आपके लिए उपयोगी हो सकता है। सही जानकारी होने से जांच को लेकर होने वाली अनावश्यक चिंता भी कम होती है।
सोनोग्राफी कैसे काम करती है? | Sonography Process in Hindi
इसमें एक विशेष ultrasound machine और एक उपकरण जिसे transducer कहा जाता है, का उपयोग होता है। यह transducer शरीर की सतह पर रखा जाता है और यह हाई फ्रीक्वेंसी अल्ट्रासाउंड वेव्स भेजता है। ये वेव्स शरीर के अंदर जाकर टिशू और अंगों से टकराकर वापस लौटती हैं, जिन्हें कंप्यूटर प्रोसेस कर एक इमेज में बदल देता है।
यह पूरी प्रक्रिया non-invasive होती है, यानी इसमें सुई या चीरफाड़ की जरूरत नहीं पड़ती।
डॉक्टर सोनोग्राफी क्यों करवाते हैं?
सोनोग्राफी शरीर के विभिन्न अंगों की जांच के लिए सबसे अधिक उपयोग होने वाली इमेजिंग तकनीकों में से एक है।
डॉक्टर निम्न स्थितियों में सोनोग्राफी कराने की सलाह दे सकते हैं:
- गर्भावस्था की पुष्टि
- भ्रूण की वृद्धि की निगरानी
- पेट दर्द
- किडनी स्टोन
- गॉलब्लैडर स्टोन
- फैटी लिवर
- थायरॉयड की गांठ
- स्तन की गांठ
- PCOS / PCOD
- गर्भाशय में फाइब्रॉइड
- ओवेरियन सिस्ट
- बांझपन (Infertility) की जांच
- पेल्विक दर्द
- असामान्य रक्तस्राव
सोनोग्राफी की प्रक्रिया (Step-by-Step)
1. डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री समझते हैं
सबसे पहले डॉक्टर आपके लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जांच के उद्देश्य को समझते हैं। उसी के अनुसार सही प्रकार की सोनोग्राफी चुनी जाती है।
2. जांच की तैयारी
कुछ सोनोग्राफी में आपको खाली पेट रहना पड़ सकता है, जबकि कुछ में जांच से पहले पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी जाती है।
3. जांच के लिए सही स्थिति
आपको जांच वाली टेबल पर आराम से लिटाया जाता है। जिस अंग की जांच होनी होती है, उसी के अनुसार आपकी स्थिति तय की जाती है।
4. त्वचा पर जेल लगाया जाता है
जांच वाले हिस्से पर एक विशेष पारदर्शी जेल लगाया जाता है। यह जेल उच्च ध्वनि तरंगों (हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स) को शरीर के अंदर आसानी से पहुंचाने में मदद करता है और अधिक स्पष्ट इमेज प्राप्त होती है।
5. ट्रांसड्यूसर (Probe) से स्कैन किया जाता है
रेडियोलॉजिस्ट या प्रशिक्षित तकनीशियन ट्रांसड्यूसर (Transducer) को त्वचा पर धीरे-धीरे घुमाते हैं। यह उपकरण उच्च ध्वनि तरंगों (हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स) को शरीर के अंदर भेजता है। ये तरंगें अंगों से टकराकर वापस आती हैं और कंप्यूटर उन्हें रियल-टाइम इमेज में बदल देता है।
6. रिपोर्ट तैयार की जाती है
स्कैन पूरा होने के बाद रेडियोलॉजिस्ट प्राप्त इमेज का विश्लेषण करते हैं और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके आधार पर डॉक्टर आगे की जांच या उपचार की योजना बनाते हैं।
कब की जाती है सोनोग्राफी? | Sonography Use Cases in Hindi
Sonography meaning in Hindi को समझने के बाद यह जानना ज़रूरी है कि किन स्थितियों में इसकी ज़रूरत होती है।
➤ Pregnancy mein sonography ka use:
गर्भावस्था में sonography यह जानने के लिए की जाती है कि:
- बच्चा ठीक से विकसित हो रहा है या नहीं
- Due date क्या है
- गर्भ में बच्चे की स्थिति क्या है
➤ पेट की बीमारियों में:
Abdominal ultrasound का प्रयोग liver, gallbladder, kidney, pancreas, और appendix की जांच के लिए किया जाता है।
➤ दिल और रक्त प्रवाह की जांच में:
Doppler ultrasound की मदद से रक्त प्रवाह और हृदय की धड़कन को भी जांचा जाता है।
➤ महिलाओं के reproductive organs की जांच:
Pelvic ultrasound या transvaginal sonography का इस्तेमाल uterus, ovaries, और fallopian tubes की जांच में किया जाता है।
सोनोग्राफी के प्रकार | Types of Sonography in Hindi
| सोनोग्राफी का प्रकार | उपयोग |
|---|
| Abdominal Ultrasound | पेट के अंगों की जांच |
| Pelvic Sonography | गर्भाशय और अंडाशय |
| Transvaginal Sonography (TVS) | महिला प्रजनन अंगों की विस्तृत जांच |
| Pregnancy Sonography | गर्भावस्था की निगरानी |
| Doppler Ultrasound | रक्त प्रवाह की जांच |
| Breast Ultrasound | स्तन की जांच |
| Thyroid Ultrasound | थायरॉयड की जांच |
| Kidney Ultrasound | किडनी और स्टोन |
| Echocardiography | हृदय की जांच |
| 3D/4D Ultrasound | भ्रूण की उन्नत इमेजिंग |

जब आप समझते हैं कि sonography meaning in Hindi क्या है, तो यह जानना भी जरूरी है कि मेडिकल फील्ड में इसकी कई तरह की जांच होती हैं। हर प्रकार की सोनोग्राफी का उद्देश्य अलग होता है और शरीर के अलग-अलग हिस्सों की जांच के लिए अलग तकनीक का उपयोग होता है।
1. Abdominal Sonography (पेट की सोनोग्राफी)
यह सबसे सामान्य प्रकार की सोनोग्राफी होती है। इसका उपयोग पेट के अंदर स्थित अंगों जैसे लीवर (liver), पित्ताशय (gall bladder), अग्न्याशय (pancreas), गुर्दे (kidneys) और मूत्राशय (bladder) की स्थिति जानने के लिए किया जाता है।
कब की जाती है:
- पेट दर्द के कारण जानने के लिए
- किडनी स्टोन या गॉलब्लैडर स्टोन की जांच के लिए
- लीवर की सूजन, सिस्ट या ट्यूमर का पता लगाने के लिए
2. Pelvic Sonography (पेल्विक सोनोग्राफी)
यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में pelvis (श्रोणि क्षेत्र) की जांच के लिए की जाती है। महिलाओं में इसका उपयोग प्रजनन अंगों (uterus, ovaries) की स्थिति जानने के लिए होता है।
कब की जाती है:
- अनियमित माहवारी (irregular periods)
- गर्भधारण में समस्या
- प्रजनन अंगों की सूजन या फाइब्रॉइड की जांच
Men के लिए: यह प्रोस्टेट ग्रंथि या मूत्राशय संबंधी समस्याओं की जांच में उपयोगी होती है।
3. Transvaginal Sonography (TVS)
यह महिलाओं के लिए की जाने वाली internal ultrasound होती है। इसमें एक पतला ट्रांसड्यूसर योनि मार्ग (vaginal canal) में डालकर uterus और ovaries की गहराई से जांच की जाती है।
कब की जाती है:
- प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में भ्रूण की स्थिति जांचने के लिए
- गर्भाशय की दीवार में गड़बड़ी, ब्लीडिंग के कारण
- गर्भपात (miscarriage) के संदेह में
यह जाँच pregnancy mein sonography kya hoti hai इस प्रश्न का भी भाग है।
4. Transrectal Sonography
यह पुरुषों के लिए प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland) की जांच के लिए की जाती है। इसमें अल्ट्रासाउंड प्रोब को मलद्वार (rectum) के रास्ते डाला जाता है।
कब की जाती है:
- प्रोस्टेट कैंसर की जांच
- पेशाब की समस्या
- पुरुष बांझपन (male infertility)
5. Doppler Ultrasound (डॉप्लर सोनोग्राफी)
यह एक विशेष प्रकार की सोनोग्राफी है जो रक्त प्रवाह (blood flow) और धमनियों में रुकावटों की जांच के लिए की जाती है।
कब की जाती है:
- गर्भावस्था में बच्चे तक रक्त प्रवाह की जांच के लिए
- पैरों में रक्त के थक्के (blood clots)
- हृदय रोग में धमनियों की जांच
डॉप्लर सोनोग्राफी उन मरीजों के लिए जरूरी है जिनमें रक्त संचार की समस्या होती है।
6. Breast Sonography (स्तन की सोनोग्राफी)
स्तनों में गांठ, दर्द या किसी तरह की असामान्य स्थिति की जांच के लिए यह सोनोग्राफी की जाती है। यह मैमोग्राफी का विकल्प या सहायक तकनीक हो सकती है।
कब की जाती है:
- स्तन में गांठ की पहचान
- ब्रेस्ट कैंसर की जांच
- dense breast tissues की clarity
7. Obstetric Sonography (गर्भावस्था में सोनोग्राफी)
यह गर्भ में पल रहे शिशु की स्थिति और विकास जानने के लिए की जाती है। इसमें बच्चे की heart beat, अंगों की स्थिति और amniotic fluid की मात्रा की जांच होती है।
कब की जाती है:
- प्रेगनेंसी के अलग-अलग चरणों में
- NT scan, Anomaly scan, Growth scan
- बच्चे की पोजिशन जानने के लिए
सोनोग्राफी से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
सही तैयारी करने से सोनोग्राफी की रिपोर्ट अधिक स्पष्ट और सटीक आती है।
पेट की सोनोग्राफी (Abdominal Ultrasound)
- 6–8 घंटे तक खाली पेट रहने की सलाह दी जा सकती है।
- इससे लिवर, पित्ताशय और अन्य अंग स्पष्ट दिखाई देते हैं।
पेल्विक सोनोग्राफी
- जांच से पहले 3–4 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है।
- भरा हुआ मूत्राशय गर्भाशय और अंडाशय की बेहतर इमेज देता है।
गर्भावस्था की सोनोग्राफी
- शुरुआती गर्भावस्था में ब्लैडर भरा होना आवश्यक हो सकता है।
- बाद की स्कैन में डॉक्टर की सलाह के अनुसार तैयारी की जाती है।
अन्य महत्वपूर्ण बातें
- आरामदायक कपड़े पहनें।
- डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयाँ समय पर लें।
- पुरानी रिपोर्ट साथ लेकर जाएँ।
गर्भावस्था में सोनोग्राफी का महत्व
गर्भावस्था के दौरान सोनोग्राफी शिशु के विकास और मां के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए सबसे महत्वपूर्ण जांचों में से एक है।
इसकी सहायता से डॉक्टर यह देख सकते हैं:
- गर्भ की पुष्टि
- भ्रूण की धड़कन
- बच्चे की वृद्धि
- बच्चे के अंगों का विकास
- प्लेसेंटा की स्थिति
- एम्नियोटिक फ्लूइड
- संभावित जन्मजात विकार
समय-समय पर की जाने वाली सोनोग्राफी गर्भावस्था को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
गर्भावस्था के दौरान ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS) की आवश्यकता कब और क्यों पड़ती है?
ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Ultrasound या TVS) एक विशेष प्रकार की सोनोग्राफी है, जिसमें एक पतला अल्ट्रासाउंड प्रोब योनि (Vagina) के माध्यम से अंदर डाला जाता है। यह जांच गर्भावस्था के शुरुआती सप्ताहों में गर्भाशय और भ्रूण की अधिक स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के लिए की जाती है।
डॉक्टर निम्न परिस्थितियों में ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं:
- शुरुआती गर्भावस्था की पुष्टि करने के लिए
- भ्रूण की हार्टबीट देखने के लिए
- एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic Pregnancy) की जांच के लिए
- गर्भाशय में भ्रूण की सही स्थिति जानने के लिए
- ब्लीडिंग या पेट दर्द के कारण का पता लगाने के लिए
- हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की निगरानी के लिए
- सर्विक्स (Cervix) की लंबाई मापने के लिए, जिससे समय से पहले प्रसव (Preterm Birth) के जोखिम का आकलन किया जा सके
यह जांच सामान्यतः सुरक्षित होती है और डॉक्टर की सलाह पर ही की जाती है।
ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड के अन्य लाभ (Other Benefits of Transvaginal Ultrasound)
गर्भावस्था के अलावा भी ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड कई स्त्री रोग संबंधी समस्याओं के निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इसके प्रमुख लाभ हैं:
- गर्भाशय की अधिक स्पष्ट इमेज प्राप्त होती है।
- अंडाशय (Ovaries) की छोटी सिस्ट भी आसानी से दिखाई देती हैं।
- एंडोमेट्रियम (Endometrium) की मोटाई का सटीक मूल्यांकन किया जा सकता है।
- फाइब्रॉइड (Fibroids) और पॉलीप्स (Polyps) की पहचान आसान होती है।
- शुरुआती असामान्यताओं का पता जल्दी लगाया जा सकता है।
- सामान्य पेट की सोनोग्राफी की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारी मिलती है।
अन्य स्थितियों में TVS के लाभ (Benefits of TVS in Other Conditions)
ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी केवल गर्भावस्था तक सीमित नहीं है। कई स्त्री रोग संबंधी स्थितियों में भी यह एक अत्यंत उपयोगी जांच है।
डॉक्टर निम्न स्थितियों में TVS की सलाह दे सकते हैं:
- PCOS / PCOD का मूल्यांकन
- बांझपन (Infertility) की जांच
- फॉलिकल मॉनिटरिंग (Follicular Monitoring)
- IVF उपचार के दौरान अंडों की वृद्धि की निगरानी
- एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis)
- ओवेरियन सिस्ट
- गर्भाशय के फाइब्रॉइड
- असामान्य मासिक धर्म
- बार-बार गर्भपात के कारणों की जांच
- पेल्विक इंफेक्शन
विशेष रूप से IVF और फर्टिलिटी उपचार में TVS सबसे महत्वपूर्ण जांचों में से एक मानी जाती है, क्योंकि इससे अंडाशय, फॉलिकल्स और एंडोमेट्रियम का सटीक मूल्यांकन किया जा सकता है।
सोनोग्राफी के फायदे और सीमाएं | Benefits and Limitations of Sonography in Hindi
अब जब आपने जाना कि types of sonography in Hindi क्या हैं, तो आइए अब इसके फायदे (advantages) और सीमाएं (limitations) विस्तार से समझते हैं।
सोनोग्राफी के फायदे (Benefits of Sonography):
1. बिल्कुल सुरक्षित और Non-invasive प्रक्रिया
सोनोग्राफी में न तो सुई लगती है और न ही शरीर को काटने की ज़रूरत पड़ती है। यह पूरी तरह से non-invasive और painless तकनीक है।
2. Radiation-free होती है
X-ray या CT scan के विपरीत, इसमें किसी भी प्रकार की हानिकारक radiation का उपयोग नहीं होता। इसी कारण से pregnancy ultrasound पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है।
3. त्वरित परिणाम (Real-time results)
जांच के तुरंत बाद इमेज और रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है, जिससे डॉक्टर तुरंत diagnosis कर सकते हैं।
4. गर्भावस्था की निगरानी में सहायक
Sonography in pregnancy भ्रूण की ग्रोथ, heartbeat, placenta की स्थिति और multiple pregnancies (जुड़वां बच्चे) जैसी स्थितियों को जानने में मदद करती है।
5. कम खर्चीली (Affordable Diagnostic Tool)
अन्य स्कैनिंग तकनीकों की तुलना में सोनोग्राफी कम खर्चीली होती है और छोटे शहरों में भी उपलब्ध रहती है।
6. Dynamic Imaging
इसमें अंगों की गति जैसे हृदय की धड़कन, रक्त प्रवाह आदि को भी live देखा जा सकता है।
❌ सोनोग्राफी की सीमाएं (Limitations of Sonography):
1. गैस या हड्डियों के पीछे की इमेज क्लियर नहीं होती
अल्ट्रासाउंड वेव्स हवा (gas) या हड्डियों (bones) से ठीक तरह नहीं गुजर पातीं। इसलिए पेट में गैस या lungs की detailed imaging के लिए यह कम उपयोगी होती है।
2. मोटापे में प्रभाव कम हो सकता है
बहुत मोटे लोगों में फैट की मोटी परतों के कारण अल्ट्रासाउंड waves ठीक से अंदर तक नहीं पहुंच पाती, जिससे इमेज साफ नहीं बन पाती।
3. हर बीमारी की पहचान संभव नहीं
कुछ जटिल मामलों में जैसे कि brain tumor, spine disorder, या small lesions में CT Scan या MRI अधिक उपयोगी होता है।
4. Operator-dependent तकनीक
सोनोग्राफी की गुणवत्ता काफी हद तक मशीन चलाने वाले डॉक्टर या टेक्नीशियन की skill पर निर्भर करती है। अनुभवी व्यक्ति न हो तो मिस-डायग्नोसिस हो सकता है।
सोनोग्राफी रिपोर्ट को कैसे समझें?
सोनोग्राफी रिपोर्ट में मेडिकल शब्दावली होने के कारण इसे समझना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता।
रिपोर्ट में आमतौर पर निम्न जानकारी होती है:
- जांच किए गए अंग का नाम
- आकार और संरचना
- किसी गांठ, सिस्ट या पथरी की जानकारी
- रक्त प्रवाह (यदि डॉप्लर किया गया हो)
- डॉक्टर की अंतिम टिप्पणी (Impression)
यदि रिपोर्ट में कोई असामान्यता दिखाई देती है, तो डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों और अन्य जांचों के आधार पर उचित उपचार की सलाह देते हैं। केवल रिपोर्ट देखकर स्वयं निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।
निष्कर्ष | Conclusion: Sonography Meaning in Hindi और इसकी उपयोगिता
अब जब आपने विस्तार से जाना कि sonography meaning in Hindi क्या होता है, इसके प्रकार कौन-कौन से होते हैं और इसके क्या फायदे और सीमाएं हैं – तो आप समझ सकते हैं कि यह तकनीक मेडिकल diagnosis में कितनी अहम भूमिका निभाती है।
चाहे वह pregnancy में fetal health जानना हो या पेट की किसी परेशानी की जड़ तक पहुंचना – सोनोग्राफी डॉक्टरों के लिए एक भरोसेमंद और सुरक्षित तरीका है।
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सोनोग्राफी से जुड़े सामान्य सवाल | FAQs
Q: क्या सोनोग्राफी दर्दनाक होती है?
नहीं, यह पूरी तरह से painless प्रक्रिया है।
Q: क्या सोनोग्राफी से साइड इफेक्ट होते हैं?
नहीं, यह पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया मानी जाती है, खासकर pregnancy में।
Q: सोनोग्राफी की कीमत कितनी होती है?
स्थान और टाइप पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्यतः ₹500 से ₹3000 तक होती है।
Q: Sonography kitni baar kara sakte hai pregnancy mein?
सामान्यतः 3–4 बार, लेकिन डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय और संख्या तय होती है।
Q: सोनोग्राफी में कितना समय लगता है?
अधिकांश मामलों में सोनोग्राफी 15–30 मिनट में पूरी हो जाती है। यदि गर्भावस्था या किसी विशेष अंग की विस्तृत जांच करनी हो, तो इसमें थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
Q: क्या सोनोग्राफी दर्द करती है?
सामान्य सोनोग्राफी बिल्कुल दर्द रहित होती है। केवल प्रोब के हल्के दबाव के कारण थोड़ा असहज महसूस हो सकता है। यदि पहले से सूजन या दर्द हो, तो थोड़ी संवेदनशीलता महसूस हो सकती है।
Q: सोनोग्राफी और अल्ट्रासाउंड में क्या अंतर है?
अधिकांश लोग “Sonography और Ultrasound में क्या अंतर है?” यह सवाल पूछते हैं।
उत्तर सरल है—दोनों एक ही जांच हैं।
- Ultrasound अंग्रेज़ी शब्द है।
- Sonography उसी तकनीक का मेडिकल नाम है।
- दोनों में उच्च ध्वनि तरंगों (हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स) से शरीर के अंदर की तस्वीरें ली जाती हैं।
- दोनों में किसी प्रकार की रेडिएशन का उपयोग नहीं होता।
इसलिए डॉक्टर चाहे Ultrasound लिखें या Sonography, दोनों का उद्देश्य एक ही होता है।
Q: क्या सोनोग्राफी सुरक्षित होती है?
हाँ। सोनोग्राफी एक सुरक्षित, गैर-आक्रामक (Non-Invasive) और Radiation-Free जांच है।
इसमें उच्च ध्वनि तरंगों (हाई फ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स) का उपयोग किया जाता है, न कि एक्स-रे या सीटी स्कैन जैसी हानिकारक रेडिएशन का। यही कारण है कि आवश्यकता होने पर गर्भावस्था के दौरान भी डॉक्टर इसे कराने की सलाह देते हैं।
हालांकि, हर मेडिकल जांच की तरह सोनोग्राफी भी केवल चिकित्सकीय आवश्यकता और योग्य डॉक्टर की सलाह पर ही करानी चाहिए।

